Shradh Sanskar with Hawan

WHY YOU NEED THIS POOJA

Shradh sanskar is very important in Hindu Religion. It is performed in the Krishna Paksha of Ashwin Month on the same Tithi when the soul passed away. In this ritual, food and other essentials as per desire of the devotee are offered for pitru to make them happy to get their blessings for happiness of all family members.

Performing this ceremony with utmost faith and a peaceful mind gives the Devotee, full benefit of this ceremony. The blessings of ancestors will always be with devotee for his happy life.

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Advantages of this Pooja:
    • By Shradh Sanskar, Devotees get blessings of their Pitru for happiness in their family.
    • The devotees get the blessings and the obstacle free prosperity in all fields.
    • Agony of Pitru dosh if any is also mitigated.
Your Pooja is Simplified

    Your Pooja is Simplified at “AstroPandit Om”

    • No of Pandits: 1, Pooja Time: 1-2hrs.
    • Pooja Cost: Ghar pe Pooja  (At your place-home or office): Rs 2101/-. Price is inclusive of Pooja Samagri. You need to arrange eatables, utensils, hawan kund, flowers / garland etc. For details what you need to arrange, check Pooja Samagri Column below. 
    • Online Pooja cost: Rs 1901/- (Select Online option under Services to book Online pooja)
Price : Rs 3101/-
Special Price : Rs 2101/-
Location :India
Category : Ghar Pe Pooja/-

Puja mainly involves following steps;

• Pavitrikaran
• Sankalp
• Shradh Sanskar and Tarpan
• Daan/ Brahman Bhojan, if devotee wish to.

    If you want some special pooja or pooja with more Pandits to be done, please write to us in detail through CONTACT US option or ON REQUEST-SPECIAL POOJA category under BOOK POOJA option.

हिन्दू धर्म में श्राद्ध को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। सूर्य का कन्या राशि में रहने वाला समय आश्विन कृष्ण पक्ष पितर पक्ष कहलाता है।  शास्त्रों में पितृयज्ञ या श्राद्धकर्म के लिए अश्विन माह का कृष्ण पक्ष नियुक्त किया गया है। पितर पक्ष के दौरान देहत्याग की तिथि पर अपने पितरों या पूर्वजों का श्राद्ध करते है,उस श्राद्ध से पितर तृप्त हो जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऐसी मान्यता है की इंसान की मौत के बाद उसकी आत्मा अगले शरीर में प्रवेश करने से पहले इधर-उधर भटकती रह सकती है। इस विचरण के समाप्त होने पर इंसान को मोक्ष की प्राप्ति हो इसके लिए हिन्दू धर्म में पितृ पूजा करने का विधान बनाया हुआ है।

श्राद्ध के दिन घर की महिलाओं को शुद्ध होकर पितरों के लिए भोजन बनाना चाहिए। ब्राह्मणों को न्योता देकर पितरों की पूजा एवं तर्पण आदि करवाना चाहिए। सुयोग्य पंडित द्वारा उचित मंत्रों से किया गया श्राद्ध ही सर्वश्रेष्ठ होता है। पितरों के निमित्त अग्नि में दही, गाय का दूध, घी एवं खीर आदि अर्पण करें। ब्राह्मण भोजन ग्रहण करने से पहले पंचबलि यानी कौए, देवता, गाय, कुत्ते और चींटी के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर निकालेंगे । एक या तीन ब्राह्मण को भोजन कराना श्रेष्ठ माना जाता है। तर्पण आदि कार्य करने के बाद  ब्राह्मण को भोजन परोसना चाहिए। श्राद्ध के दिन, इच्छा के अनुसार वस्त्र, अनाज, गुड़, चांदी, गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, नमक आदि का गरीबों और ब्राह्मणों को दान किया जा सकता है।

To be arranged by Panditji

Hawan Samgri and Samidha, Gangajal, Roli-Moli, aam-patte, Paan-patte-Supari, Kapoor, Kale Til, Jau, Janeau, Diya, Agarbatti-Dhoop, Batti etc.

To be arranged by you (Devotee)

Eatables like Milk, Curd, Cow Ghee, Honey, Sugar, Haldi, Rice, Fruits, Tulsi patte, Flower/Mala, Hawan Kund etc.

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