Kundli Consultation, know which puja you need to do Rs 501/-

WHY YOU NEED THIS CONSULTATION

Sometimes many of us really don’t know what wrong is going on in our lives and why? Why we are going through a very tough time. In spite of your genuine efforts, we are not getting desired good results. Expected things are being delayed unnecessarily.

Actually, planets placed in our horoscope at the time of birth determines the good and bad effects on our life. Sometimes bad position of planets in our Kundli may affect our happiness, peace and progress.

Following main Dosha are considered to be malefic in nature, this period is considered to be very tough time in everybody's life which can affect the happiness and the prosperity.

  1. Manglik Dosha
  2. Kaal Sarp Dosha
  3. Pitra Dosha
  4. Shani Sade Sati
  5. Birth in Mool Nakshatra

A simple pooja relevant to the actual need can connect us to the cosmic intelligence to avert any hindrances in your life and bestow tremendous peace and success in your life. Therefore, we must understand the power of pooja and do it.

To know which pooja you need to do, please write to us on Contact us  or mail on info@astropanditom.com. We will be happy to provide the details.

Kindly give following information through Contact us;

1.            Your name:

2.            Date of birth:

3.            Time of Birth:

4.            Place of Birth:

5.           Main problem you are facing currently in brief.

 

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Advantages of this Pooja:

    A suitable pooja if you can know on time may help to appease the planets for better results and enhance happiness, peace and prosperity in your Life.

    Sometimes you really don't Know what wrong is going on with you.

    This may be because of inauspicious placement of planets in your Horoscope and may be some DOSHA in your Kundli.

Your Pooja is Simplified

    As per your booking, our expert will call you at right time or if you want details on e-mail, we will give the details through e-mail within 24 Hrs, we will send you the details of your questions or the pooja you need to do with Shubh Muhurt.

Price : Rs 501/-
Special Price : Rs 1/-
Location :India
Category : Ghar Pe Pooja/-

As per your Horoscope requirement.

    If you want some special pooja or pooja with more Pandits to be done, please write to us in detail through CONTACT US option or ON REQUEST-SPECIAL POOJA category under BOOK POOJA option.

यह जानने के लिए कि आपको कौन सी पूजा करनी है, कृपया हमसे संपर्क करें Contact us पर लिखें या info@astropanditom.com पर मेल करें। हमें विवरण प्रदान करने में खुशी होगी।

कृपया हमसे संपर्क करके निम्नलिखित जानकारी दें ;
1. आपका नाम:
2. जन्म तिथि:
3. जन्म का समय:
4. जन्म स्थान:
5. मुख्य समस्या जिसका आप वर्तमान में सामना कर रहे हैं संक्षेप में।

कई बार आपने देखा होगा कि इंसान के बने बनाए काम खराब हो जाते हैं. इस स्थिति में इंसान अपनी किस्मत को कोसने लगता है. यह पूरा खेल आपकी कुंडली और कुंडली मे मौजूद दोषों की वजह से होता है. ऐसी स्थिति में अगर आप थोड़ा पहले इसके उपाय खोज लें तो आपके काम नहीं बिगड़ेंगे और इन दोषों का ज्यादा प्रभाव आप पर नहीं पड़ेगा. इसके लिए ग्रह अथवा नक्षत्रों की शांति के लिए पूजा की जाती है. नकारात्मक प्रभावों को कम करने और सकारात्मक ऊर्जा में सुधार करने के लिए पूजा करानी चाहिए।

कुंडली में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुख्य दोष पाए जाते हैं;

मंगल दोष: यदि किसी व्यक्ति की कुंडली के लग्न भाव, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, द्वादश भाव में मंगल स्थित हो तो कुंडली में मंगल दोष होता है। जब लग्न में ये स्थिति होती है तो जातक का स्वभाव अत्यधिक तेज, गुस्सैल, और अहंकारी होता है। चतुर्थ में मंगल जीवन में सुखों में कमी करता है और पारिवारिक जीवन में कठिनाइयां आती हैं।

काल सर्प दोष : जब किसी व्यक्ति की कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच में आ जाते हैं तो इस योग को काल सर्प दोष का नाम दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में यह दोष लग जाता है उसे सफलता बहुत देरी से मिलती और जातक को हर काम में बाधा का सामना करना पड़ता है।

पितृ दोष योग: किसी जातक की कुंडली में लग्नेश यदि छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित है और राहु लग्न में है तब यह पितृ दोष का योग होता है. जन्म कुण्डली के पहले, दूसरे, चौथे, पांचवें, सातवें, नौवें या दसवें भाव में यदि सूर्य-राहु या सूर्य-शनि एक साथ स्थित हों तब यह भी पितृ दोष माना जाता है. व्यक्ति की कुण्डली में पितृ दोष  ऎसा दोष है जो सब दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है.

शनि की साढ़े साती: जब शनि किसी जातक की जन्मराशि से द्वादश या प्रथम या द्वितीय स्थान में होते हैं तो यह स्थिति शनि की साढ़े साती कहलाती है। इस अवस्था में शनि जातक को मानसिक कष्ट, शारीरिक कष्ट और गृह-क्लेश का सामना कराते हैं। शनि एक राशि में करीब ढाई साल तक रहते हैं।

मूल नक्षत्र में जन्म: मान्यता है कि इस नक्षत्र में जब जन्म होता है तो उसका सीधा प्रभाव जातक की सेहत व स्वभाव पर पड़ता है। मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले बच्चे को कुछ समय तक परेशानियां होती हैं। इसलिए इन नक्षत्रों का ज्यादा प्रभाव बच्चों पर न पड़े इसके लिए ग्रह-नक्षत्रों के लिए शांति के लिए पूजा की जाती है.

It will be as per Pooja Details later.

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