Gand Mool Nakshatra Shanti Pooja

WHY YOU NEED THIS POOJA

The Gand Mool Nakshatra Shanti Pooja or Gand Mool Dosh Nivaran Pooja is done for a person who is born in the Gand Mool Nakshatras. There are total 27 Nakshatras in Vedic Astrology. Out of  these total 27 Nakshatras, Mool, Jyestha and Ashlesha Nakshatras are the main Mool Nakshatras and Ashwini, Revati and Magha are the subsidiary Mool Nakshatras. Thus in total there are 6 Mool Nakshatras. The Nakshatras ruled by Ketu and Mercury are known as Gand Mool Nakshatra.

It is desirable that this pooja is done through a well experienced Pandits to get best results. In pooja Father, Mother and Child should wear new pair of cloths.

This pooja may be performed within 27th day after the birth of the concerned newly born baby or if the pooja cannot be done within 27th days of birth due to some unavoidable reasons then it can be performed later when the Moon comes to the birth nakshatra as soon as possible for Worshipping, Pacifying, and pleasing the lord of the birth nakshatra for best results, prosperity and mitigating the agony of this Dosha.

Depending on the degree of Moon at the time of Birth, it may cause danger to the baby, parents or other relatives like Mother, Father, and maternal Uncle. Native may suffer serious physical and mental issues or financial problems throughout the life. Therefore, it is advisable that this pooja should be performed as early as possible so that the sweetness of baby becomes more sweeter day by day.

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Advantages of this Pooja:
    • Pooja is helpful in mitigating the ill effects of Gand Mool Nakshatra Dosh that may seriously harm baby, Mother, Father, and maternal Uncle
    • This Pooja will improve the mental and physical health of the native.
    • This Pooja will improve financial troubles that the person is likely to suffer throughout their life.
    • Will make relationships and family life harmonious.
    • Will enhance happiness and prosperity in the life of native.
Your Pooja is Simplified

    Your Pooja is Simplified at “AstroPandit Om”

    • No of Pandits: 3, Time: 4-5 Hrs. No of jaaps: 21000
    • Pooja Cost: Ghar pe Pooja  (At your place-home or office): Rs 6901/-.This pooja requires special Pooja Samagri. Price is inclusive of all Pooja Samagri. You need to arrange eatables, utensils, flowers / garland etc. For details what you need to arrange, check Pooja Samagri Column below.
    • Online Pooja cost: Rs 5301/-. 
Price : Rs 8100/-
Special Price : Rs 6901/-
Location :India
Category : Ghar Pe Pooja/-

निश्चित समय पर पंडित जी निर्धारित संख्या में आपकी सुविधा अनुसार 21000 जाप करेेंगे और उसके उपरांत विधि विधान से हवन करेंगे।

    If you want some special pooja or pooja with more Pandits to be done, please write to us in detail through CONTACT US option or ON REQUEST-SPECIAL POOJA category under BOOK POOJA option.

इस पूजा के महत्‍व

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में गंडमूल नक्षत्रों को दोषकारी माना जाता है।  27 नक्षत्रों में से मूल, ज्येष्ठा और आश्लेषा नक्षत्र मुख्य मूल नक्षत्र हैं और अश्विनी, रेवती और मघा सहायक मूल नक्षत्र हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर 6 मूल नक्षत्र हैं। मूल नक्षत्रों को सतैसा या गण्डात कहा जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब किसी शिशु का जन्म गण्डमूल नक्षत्र में हो तो इसको गंडमूल दोष कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में आचार्यों के अनुसार, इन नक्षत्रों में जन्म लेने वाले जातक को जीवन में बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक, उसे स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही समाज, करियर, नौकरी, विवाह, वित्त, संपत्ति, प्रत्यक्षवादी, मन एवं उसके जीवन के अन्य पहलू भी प्रभावित हो सकते हैं। बालक के माता-पिता, मामा, भाई-बहिनों और पति या पत्नी के जीवन पर भी इस दोष का कष्टकारी प्रभाव पड़ सकता है। जातक के परिवार में दरिद्रता, और दुर्घटना का भी भय बना रह सकता है और जातक भाग्यहीन सा हो सकता है। ऐसे भी कहा जाता है कि यदि बच्चे का जन्म गंडमूल नक्षत्र में हुआ है तो उसके पिता को चाहिए कि अपने बच्चे का चेहरा न देखे और अपनी जेब में फिटकरी का एक टुकड़ा रख ले। गंडमूल शांति पूजा के बाद ही पिता अपने बच्चे को विधिवत पूजा करके ही देखें तो ज्यादा शुभ होगा।

इसलिए इस नक्षत्र में पैदा हुए शिशु और उसके परिजनों की भलाई के लिए गंडमूल शांति पूजा कराना अति आवश्यक है। इसे किसी विद्वान तथा योग्य पंडित द्वारा ही करवाना चाहिए जिसे मूल शांति कराने का पूर्ण ज्ञान हो। योग्य पंडितों द्वारा इस पूजा को जन्म के 27 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए। चूंकि नवोदित बच्चे के लिए यह पूजा बहुत प्रभावी और आवश्यक है। इसलिए इस पूजा में देरी नहीं करनी चाहिए ताकि जातक की सुरक्षा एवं पवित्रता बनी रहे और जीवन मंगलमय रहे । मूल नक्षत्र शांति पूजा कराने से लगने वाले दोष शांत हो जाते हैं। यदि गंडमूल शांति पूजा शिशु के जन्म के 27वें दिन के भीतर न हो पाएं अथवा किसी कारण से गंडमूल दोष के बारे में आपको विलम्ब से पता चले तो भी आप इसकी शांति पूजा बिना देरी के उपयुक्त मुहूर्त पर करवा सकते हैं। शांति पूजा और यज्ञ के बाद ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देना और उन्हें भोजन करवाना शुभ होता है।

जब कोई व्यक्ति इस नश्वर पृथ्वी पर जन्म लेता है, तो वह जन्म तिथि, जन्म समय एवं जन्मस्थान जैसी कुछ प्रमुख चीजों के साथ पैदा होता है। तो चंद्रमा और अन्य ग्रहों में उसके विशिष्ट राशि चिन्ह होते हैं। इनका जन्म लेने वाले व्यक्ति के जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। इन ग्रहों के अलावा, 27 नक्षत्र चंद्र पथ का विभाजन करते हैं। इनका भी व्यक्ति के जीवन पर एक अच्छा और शक्तिशाली प्रभाव होता है। कभी-कभी, यह नक्षत्र हानिकारक भी होते हैं। यह बहुत हद तक व्यक्ति की उदासी का भी कारण बन सकते हैं। यदि जन्म के दौरान चंद्रमा प्रबल होता है तो यह व्यक्ति के दृष्टिकोण, व्यक्तित्व, शारीरिक बनावट एवं भविष्य को प्रभावित करता है। जन्म नक्षत्र सोच की दिशा, भाग्य, प्रतिभा को नियंत्रित करता है। तथा व्यक्तित्व के अवचेतन प्रभावों को भी नियंत्रित करता है। नक्षत्र शांति पूजा नक्षत्रों के बुरे प्रभावों को दूर करने हेतु की जाती है।

इस पूजा में संबंधित नक्षत्र से जुड़े मंत्र का 21000 बार जप किया जाता है। पूजा में 27 अलग-अलग जगहों का पानी एकत्रित किया जाता है, 27 अलग-अलग पेड़ की लकड़ियों से हवन किया जाता है।

ऐसे भी कहा जाता है कि अगर मूल नक्षत्र के कारण बच्चे का स्वास्थ्य कमजोर रहता हो तो बच्चे की माता को पूर्णिमा का उपवास रखना चाहिए। अगर बच्चे की राशी मेष और नक्षत्र अश्विनी है तो बच्चे को हनुमान जी की उपासना करवाएं। अगर राशि सिंह और नक्षत्र मघा है तो बच्चे से सूर्य को जल अर्पित करवाएं। अगर बच्चे की राशि धनु और नक्षत्र मूल है तो गुरु और गायत्री उपासना अनुकूल होगी। अगर बच्चे की राशी कर्क और नक्षत्र आश्लेषा है तो शिवजी की उपासना उत्तम रहेगी। वृश्चिक राशि और ज्येष्ठा नक्षत्र होने पर भी हनुमान जी की उपासना करवाएं। अगर मीन राशि और रेवती नक्षत्र है तो गणेश जी की उपासना से लाभ होगा। अश्विनी, मघा, मूल नक्षत्र में जन्में जातकों को गणेशजी की पूजा अर्चना करने से लाभ मिलता है और आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती नक्षत्र में जन्में जातकों के लिए बुध ग्रह की अराधना करने से लाभ मिलता है। बुधवार के दिन हरी वस्तुओं का दान करने से लाभ मिलता है।

By Panditji

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To be arranged by you (Devotee)

Eatables like Milk, curd, Cow Ghee, Honey, Sugar powder, Sweets, Haldi, Rice, Fruits, Panchmewa, Tulsi, Flower, Mala, Nariyal, Kalash, Hawan Kund, Batashe, aata, white, red and yellow cloth-1.25m, , chhed wala ghada(27 chhed), 5gole etc. There is no requirement of any specific Daan (Donation) for this puja to Panditiji. It is as per your wish.

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